Amargyan

सच जो सामने दिखाई दे ...

19 Posts

117 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 6178 postid : 88

मैंने देखा है ...

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मैंने देखा है …
इस जग में कितनो को रोता हुआ
किसी को ले लो
कोई अपने कर्मो से रोता है
तो कोई अपने पूर्व कर्मो से रोता है ||

कोई चिंता कर कर रोता है
कोई रो रो कर रोता है ..
यह कैसी दुनिया है …
जहा अपने ही अपनों की
रक्त बहाने की चाहत रखता है |
पुत्र पिता से नफरत का
मशाल जलाये रखा है …||

माता भी कुमाता बने को तैयार है
जो मैं देखा रहा हू …
यह कैसी लीला है |
जो जगत्प्रभु के भी समझ के परे है …||

कई को ख़ुशी से रोता हुआ देखा है ..
कई को प्यार में धोखा खा कर
रोने वाले को भी देखा है
प्यार में मरते हुए भी देखा है
प्यार के नाम पे कितनो को लात – जुते खाते हुए भी देखा है ||

देखा तो बहुत कुछ है …
कुछ तो कहने योग्य ही नहीं है ..
की वो किस बात पे रोते है ..
जिनको कष्ट का ज्ञान ही नहीं है …||

यह कैसी दुनिया है ..
जहा लोग बात बात पे रोते है ..
कुछ तो बिना बात के भी रोते है ..
जिनको देख के सामने वाला भी रो देता है ||

कुछ तो मन ही मन में रोते है ..
जो घुट घुट के मरते है ..
यह कैसी विडंबना है !
चारो ओर बस रोने वाले ही नजर आते है …||

क्यू रोते है ..??????
किसी ने सोचा है !
उनको रुलाने वाले और कोई नहीं बस हमही अपने है ..
जो स्वार्थ में अपनों का ही गला घोट रहे है …
यह कैसा रोना है !!!!

जिसे देख कर मेरे नयन नीर छलकने को व्याकुल है | |

अमरेश बहदुर सिंह
(Amresh bahadur Singh )

please visit my other blog link ….. http://meraghumakkadshastra.blogspot.com/

| NEXT



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lahar के द्वारा
October 25, 2011

अमरेश जी सप्रेम नमस्कार बिलकुल सत्य को प्रदर्शित आपकी ये कविता सत्य पर आधारित है | पार्थ जी सप्रेम नमस्कार सही बात है यहाँ की व्यवस्था ही एसी है की हर देश भक्त पर उगली उठाने का रिवाज चल पड़ा है | हमारे प्रिय नेता मर्यादाओ का उलंघन कर उन लोगो पर भी कीचड़ उछलने का प्रयास करते है जो वास्तव में देश भक्त है | http://lahar.jagranjunction.com/2011/10/24/%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF/

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 25, 2011

    शुक्रिया लहर जी …….

nishamittal के द्वारा
October 20, 2011

अमरेश जी यथार्थ व कटु सत्य का बखान करती है आपकी रचना

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 20, 2011

    आदरणीय निशा जी………… आप का बहुत बहुत शुक्रिया इस महान सत्य का दर्शन करने के लिए ……

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 20, 2011

    आदरणीय निशा जी………… आप का बहुत बहुत शुक्रिया इस महान सत्य का दर्शन कराने के लिए …

Santosh Kumar के द्वारा
October 19, 2011

प्रिय अमरेश भाई जी ,.बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति ,.साधुवाद

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 19, 2011

    very very thanks you …. Dear Santosh ji ……

abodhbaalak के द्वारा
October 19, 2011

बहुत ही सुन्दर रचना अमरेश जी सच है, हम खुद ही रोते हैं कभी अपने कर्मो से, तो कभी दूसरो ……………….. ऐसे ही लिखते रहें …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 19, 2011

    प्रिय अबोध जी शुक्रिया इसे एक सुंदर रचना करार देने के लिए ….

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 19, 2011

    अबोध जी इस मृत्युलोक में जो आया है सभी रोते है ……… बस उसके कारण अलग अलग होते है … कभी हम अपनी पुरानी यादो को ले कर रोते है … तो   कभी  भविष्य  के  संकट को देख के   रोते है … की क्या हम इस ज़माने का मुकाबला कर पायेंगे …

akraktale के द्वारा
October 19, 2011

अमरेशजी नमस्कार, बहुत ही खूबसूरती से जमाने को हकीकत बयाँ करती ये रचना आँखे बंद कर सोचने को मजबूर करती है.साधुवाद.

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय akraktale जी नमस्कार…. आप के इस प्रतिक्रिया के बहुत बहुत धन्यवाद ….

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय akraktale जी नमस्कार…. आप के इस प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ….

    Amresh Bahadur Singh के द्वारा
    October 19, 2011

     आदरणीय akraktale जी …. ये जमाना ही खुद हमें ये लिखने और सोचने के लिए मजबूर कर देता है …. की इसे भी हिंदी सहित्य के माध्यम से जनतंत्र तक पहुचाओ ….


topic of the week



latest from jagran