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फिर भी वंचित रहा जग देखन को ...

Posted On: 23 Dec, 2017 कविता में

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मैंने जग देखा ,
मैंने जग देखा |
फिर भी वंचित रहा ..
जग देखन को ||१
मैंने जग घुमा ,
जग देखन को |
दिल्ली,आगरा , ग्वालियर.
मथुरा ,वृन्दावन ..
फिर भी वंचित रहा..
जग देखन को ||२
जग देखन की उत्सुकता में ,
रील देखा, रियल देखा |
संचार के अन्य स्रोत देखा ,
फिर भी वंचित रहा जग देखन को ||३
उत्सुकता की आवेश में ..
माया-नगरी देखी,
धर्म-नगरी देखी|
न्याय की कसौटी देखी ,
फिर भी वंचित रहा ..
जग देखन को || ४
थाट-बाट वाले देखे ,
साने शौकत वाले देखे |
मौनी जैसे सुमकट देखे ,
रोडपति से खरबपति देखे |
फिर भी वंचित रहा जग देखन को ..
फिर भी वंचित रहा जग देखन को ||५

– अमरेश बहादुर सिंह

Web Title : फिर भी वंचित रहा जग देखन को,Amresh Bahadur Singh



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